1984 में सिंधिया से चुनाव हारने के बाद सिनेमा देखने चले गए थे 'भारत रत्न' वाजपेयी
नई दिल्ली. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और बनारस
हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संस्थापक मदन मोहन मालवीय को देश का
सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' दिए जाने का फैसला किया गया है।
वाजपेयी देश के सबसे चर्चित प्रधानमंत्रियों में से एक माने जाते हैं। उनकी
जिदंगी से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें पर नजर डालिए:
चुनाव हारने के बाद सिनेमा देखने चले गए थे वाजपेयी और आडवाणी
वाजपेयी राजनीति में रमे रहने के बावजूद कभी भी हार या जीत से प्रभावित
नहीं होते थे। बताया जाता है कि 1984 के लोकसभा चुनाव में माधवराव सिंधिया
से ग्वालियर से हारने के बाद वाजपेयी सिनेमा देखने चले गए थे। उस चुनाव में
इंदिरा गांधी के निधन के बाद कांग्रेस ने 400 से ज्यादा सीटें जीती थीं।
मंत्री बनते ही अपने भांजे को दी थी सीख
मुरैना से बीजेपी के सांसद अनूप मिश्रा के मुताबिक, 'मामा (अटलजी) हमेशा
बेदाग रहे हैं। यही सीख उन्होंने हमें भी दी। जब मैं पहली बार मंत्री बना
था, तब उनसे मिले गया था। उन्होंने ज्यादा खुशी जाहिर नहीं की। बल्कि उनकी
पेशानी पर थोड़े बल थे। कहने लगे- देखो! यह फिसलन भरी जमीन है। मंत्री जरूर
बन गए हो। लेकिन संयम रखना। विवादों से बचना। खुद पर दाग मत लगने
देना।...जब सांसद बना तो फिर उनसे मिले गया। तब तक वे बोलना काफी कम कर
चुके थे। लेकिन उनकी नजरें मुझसे यही कह रही थीं कि बेदाग रहने की सीख को
कभी मत भूलना। सिफारिशों के वे सख्त विरोधी थे। उन्होंने मेरे लिए कभी कोई
सिफारिश नहीं की। न मंत्री बनने में, न टिकट दिलाने में। उन्होंने कभी यह
नहीं कहा कि वे किसी के टिकट के लिए शिवराज सिंह
चौहान से या किसी और से बात करेंगे। वे सिफारिशों और अपने प्रभाव के
दुरुपयोग के सख्त विरोधी थे। जो उनसे एक बार मिलता था, मुरीद हो जाता था।'
राष्ट्रपति ने ट्वीट कर दी जानकारी
पूर्व पीएम और सीनियर बीजेपी लीडर अटल बिहार वाजपेयी और स्वंतत्रता
सेनानी और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के संस्थापक मदन मोहन मालवीय को 'भारत
रत्न' दिया जाएगा। राष्ट्रपति भवन से बुधवार को ट्वीट करके इस बारे में
जानकारी दी गई। इससे पहले, केंद्रीय कैबिनेट की मीटिंग में इस बारे में
फैसला लिया गया और सिफारिश राष्ट्रपति को भेजी गई। बता दें कि अटल का 25
दिसंबर को 90वां जन्मदिन है। केंद्र सरकार पहले ही यह एलान कर चुकी है कि
वह अटल के जन्मदिन गुरुवार को 'गुड गर्वनेंस डे' के तौर पर मनाएगी।
बीजेपी के शीर्ष नेताओं अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह और अमित शाह
की मौजूदगी में हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया। बता दें कि
इसी साल मई में केंद्र की सत्ता पर काबिज होने वाली बीजेपी पिछले पांच साल
से यह मांग करती रही है कि अटल बिहारी वाजपेयी को 'भारत रत्न' से सम्मानित
किया जाए। पार्टी ने यूपीए सरकार द्वारा क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर और वैज्ञानिक सीएआर राव को 'भारत रत्न' दिए जाते वक्त अटल को यह सम्मान न दिए जाने पर नाराजगी जाहिर की थी।
मोदी ने निभाया वादा
पं. मदन मोहन मालवीय जैसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और शिक्षाविद् को 'भारत रत्न' दिए जाने का वादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान ही कर चुके थे। मालवीय को ‘महामना’ के नाम
से भी जाना जाता है। मालवीय ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी
और मोदी वहीं से ही सांसद हैं।
ऐसे होता है नाम तय
भारत रत्न पुरस्कार 1954 में आरंभ किया गया था। प्रधानमंत्री मिली
सिफारिशों के आधार पर नाम तय करते हैं और इसकी अनुशंसा राष्ट्रपति को भेजते
हैं। पुरस्कार स्वरूप राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित प्रशस्ति पत्र और
पीपल की पत्ती के आकार का मेडल प्रदान किया जाता है। यह देश का सर्वोच्च
नागरिक सम्मान है। अब तक 43 मशहूर हस्तियों को इस पुरस्कार से नवाजा जा
चुका है। इनमें सी. राजगोपालाचारी, वैज्ञानिक सीवी. रमन और गायिका लता
मंगेशकर भी शामिल हैं।
अटल के परिवार में खुशी
वाजपेई के परिजनों ने इस फैसले पर ख़ुशी ज़ाहिर की है।
हालांकि, उनका कहना है कि इसमें थोड़ी देर हुई है, लेकिन फिर भी ये बड़ी बात
है। भाजपा सांसद और अटल जी के भांजे अनूप मिश्रा ने भास्कर डिजिटल से
बातचीत के दौरान कहा कि अटल जी को भारत रत्न दिए जाने की जब उन्हें सूचना
मिली, तो आम हिंदुस्तानी की तरह उन्हें भी बहुत ख़ुशी हुई। अनूप के मुताबिक,
अटल जी वैश्विक शांति के दूत रहे हैं। मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी को इसके लिए उनका पूरा परिवार धन्यवाद देता है।
नई दिल्ली. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और बनारस
हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संस्थापक मदन मोहन मालवीय को देश का
सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' दिए जाने का फैसला किया गया है।
वाजपेयी देश के सबसे चर्चित प्रधानमंत्रियों में से एक माने जाते हैं। उनकी
जिदंगी से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें पर नजर डालिए:
चुनाव हारने के बाद सिनेमा देखने चले गए थे वाजपेयी और आडवाणी
वाजपेयी राजनीति में रमे रहने के बावजूद कभी भी हार या जीत से प्रभावित नहीं होते थे। बताया जाता है कि 1984 के लोकसभा चुनाव में माधवराव सिंधिया से ग्वालियर से हारने के बाद वाजपेयी सिनेमा देखने चले गए थे। उस चुनाव में इंदिरा गांधी के निधन के बाद कांग्रेस ने 400 से ज्यादा सीटें जीती थीं।
वाजपेयी राजनीति में रमे रहने के बावजूद कभी भी हार या जीत से प्रभावित नहीं होते थे। बताया जाता है कि 1984 के लोकसभा चुनाव में माधवराव सिंधिया से ग्वालियर से हारने के बाद वाजपेयी सिनेमा देखने चले गए थे। उस चुनाव में इंदिरा गांधी के निधन के बाद कांग्रेस ने 400 से ज्यादा सीटें जीती थीं।
मंत्री बनते ही अपने भांजे को दी थी सीख
मुरैना से बीजेपी के सांसद अनूप मिश्रा के मुताबिक, 'मामा (अटलजी) हमेशा बेदाग रहे हैं। यही सीख उन्होंने हमें भी दी। जब मैं पहली बार मंत्री बना था, तब उनसे मिले गया था। उन्होंने ज्यादा खुशी जाहिर नहीं की। बल्कि उनकी पेशानी पर थोड़े बल थे। कहने लगे- देखो! यह फिसलन भरी जमीन है। मंत्री जरूर बन गए हो। लेकिन संयम रखना। विवादों से बचना। खुद पर दाग मत लगने देना।...जब सांसद बना तो फिर उनसे मिले गया। तब तक वे बोलना काफी कम कर चुके थे। लेकिन उनकी नजरें मुझसे यही कह रही थीं कि बेदाग रहने की सीख को कभी मत भूलना। सिफारिशों के वे सख्त विरोधी थे। उन्होंने मेरे लिए कभी कोई सिफारिश नहीं की। न मंत्री बनने में, न टिकट दिलाने में। उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि वे किसी के टिकट के लिए शिवराज सिंह चौहान से या किसी और से बात करेंगे। वे सिफारिशों और अपने प्रभाव के दुरुपयोग के सख्त विरोधी थे। जो उनसे एक बार मिलता था, मुरीद हो जाता था।'
मुरैना से बीजेपी के सांसद अनूप मिश्रा के मुताबिक, 'मामा (अटलजी) हमेशा बेदाग रहे हैं। यही सीख उन्होंने हमें भी दी। जब मैं पहली बार मंत्री बना था, तब उनसे मिले गया था। उन्होंने ज्यादा खुशी जाहिर नहीं की। बल्कि उनकी पेशानी पर थोड़े बल थे। कहने लगे- देखो! यह फिसलन भरी जमीन है। मंत्री जरूर बन गए हो। लेकिन संयम रखना। विवादों से बचना। खुद पर दाग मत लगने देना।...जब सांसद बना तो फिर उनसे मिले गया। तब तक वे बोलना काफी कम कर चुके थे। लेकिन उनकी नजरें मुझसे यही कह रही थीं कि बेदाग रहने की सीख को कभी मत भूलना। सिफारिशों के वे सख्त विरोधी थे। उन्होंने मेरे लिए कभी कोई सिफारिश नहीं की। न मंत्री बनने में, न टिकट दिलाने में। उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि वे किसी के टिकट के लिए शिवराज सिंह चौहान से या किसी और से बात करेंगे। वे सिफारिशों और अपने प्रभाव के दुरुपयोग के सख्त विरोधी थे। जो उनसे एक बार मिलता था, मुरीद हो जाता था।'
राष्ट्रपति ने ट्वीट कर दी जानकारी
पूर्व पीएम और सीनियर बीजेपी लीडर अटल बिहार वाजपेयी और स्वंतत्रता
सेनानी और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के संस्थापक मदन मोहन मालवीय को 'भारत
रत्न' दिया जाएगा। राष्ट्रपति भवन से बुधवार को ट्वीट करके इस बारे में
जानकारी दी गई। इससे पहले, केंद्रीय कैबिनेट की मीटिंग में इस बारे में
फैसला लिया गया और सिफारिश राष्ट्रपति को भेजी गई। बता दें कि अटल का 25
दिसंबर को 90वां जन्मदिन है। केंद्र सरकार पहले ही यह एलान कर चुकी है कि
वह अटल के जन्मदिन गुरुवार को 'गुड गर्वनेंस डे' के तौर पर मनाएगी।
बीजेपी के शीर्ष नेताओं अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह और अमित शाह
की मौजूदगी में हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया। बता दें कि
इसी साल मई में केंद्र की सत्ता पर काबिज होने वाली बीजेपी पिछले पांच साल
से यह मांग करती रही है कि अटल बिहारी वाजपेयी को 'भारत रत्न' से सम्मानित
किया जाए। पार्टी ने यूपीए सरकार द्वारा क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर और वैज्ञानिक सीएआर राव को 'भारत रत्न' दिए जाते वक्त अटल को यह सम्मान न दिए जाने पर नाराजगी जाहिर की थी।
मोदी ने निभाया वादा
पं. मदन मोहन मालवीय जैसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और शिक्षाविद् को 'भारत रत्न' दिए जाने का वादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान ही कर चुके थे। मालवीय को ‘महामना’ के नाम
से भी जाना जाता है। मालवीय ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी
और मोदी वहीं से ही सांसद हैं।
ऐसे होता है नाम तय
भारत रत्न पुरस्कार 1954 में आरंभ किया गया था। प्रधानमंत्री मिली
सिफारिशों के आधार पर नाम तय करते हैं और इसकी अनुशंसा राष्ट्रपति को भेजते
हैं। पुरस्कार स्वरूप राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित प्रशस्ति पत्र और
पीपल की पत्ती के आकार का मेडल प्रदान किया जाता है। यह देश का सर्वोच्च
नागरिक सम्मान है। अब तक 43 मशहूर हस्तियों को इस पुरस्कार से नवाजा जा
चुका है। इनमें सी. राजगोपालाचारी, वैज्ञानिक सीवी. रमन और गायिका लता
मंगेशकर भी शामिल हैं।
अटल के परिवार में खुशी
वाजपेई के परिजनों ने इस फैसले पर ख़ुशी ज़ाहिर की है।
हालांकि, उनका कहना है कि इसमें थोड़ी देर हुई है, लेकिन फिर भी ये बड़ी बात
है। भाजपा सांसद और अटल जी के भांजे अनूप मिश्रा ने भास्कर डिजिटल से
बातचीत के दौरान कहा कि अटल जी को भारत रत्न दिए जाने की जब उन्हें सूचना
मिली, तो आम हिंदुस्तानी की तरह उन्हें भी बहुत ख़ुशी हुई। अनूप के मुताबिक,
अटल जी वैश्विक शांति के दूत रहे हैं। मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी को इसके लिए उनका पूरा परिवार धन्यवाद देता है।
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