कृष्ण की भक्ति का रंग
गोकुल और मथुरा से हज़ारों किलोमीटर दूर यूरोप के देशों में रहने वाले लोगों
के भी सिर चढ़कर बोल रहा है। यूरोप के कई देशों में ऐसी सैकड़ों युवतियां
हैं, जो खाने-पीने से लेकर अपने कल्चर को छोड़कर हाथ में माला, माथे पर
तिलक और सिर पर पल्ला डालकर कृष्ण की मीरा बन गई हैं। किसी ने अपना
पारिवारिक फार्मिंग बिजनेस छोड़ा, तो किसी ने मल्टीनेशनल कंपनी में
जियोलाजिस्ट का जॉब, किसी ने क्रूज कंपनी के एचआर मैनेजर पद को अलविदा कहा,
तो किसी ने अपनी पाश्चात्य सभ्यता को। इस्कान के स्वर्ण जयंती महोत्सव में
भाग लेने इंदौर आई इन यूरोपियन बालाओं ने भास्कर डॉॅट काॅम को बताई, अपनी भक्ति की कहानी
करोड़ों का फाॅर्म बिजनेस खेती छोड़कर बनी कृष्ण की मीरा : दुनियाभर में फैशन और ग्लैमर के मक्का के रूप में मशहूर फ्रांस के सबसे बडे़ शहरों में से एक चेत्राक्स की रहने वाली कैटरीना अब कलावती दास माताजी बन गई हैं। कभी प्रतिदिन क्लब, डांस, ड्रामा और पार्टीज में शामिल होने वाली कैटरीना बताती हैं कि अब वे प्रतिदिन सुबह 4 बजे उठकर सोलह मालाएं जपती हैं। कृष्ण का श्रृंगार करती हैं और अपने आसपास के लोगों को कृष्ण से जोड़ने का प्रयास करती हैं।
सवालों के जवाब नहीं मिले : कलावती दास बताती हैं कि उनके जीवन में दौलत शोहरत के साथ ही सबकुछ था, लेकिन एक बेचैनी बनी रहती थी। वे कई बार चर्च भी जाती थीं, लेकिन उनके मन में उठने वाले सवालों के जवाब नहीं मिल रहे थे। वह जानना चाहती थीं कि क्यों कोई उनके जैसे अमीर घर में पैदा होता है और क्यों कोई सोमालिया जैसी जगह में जन्म लेता है, जहां उसे खाना भी नसीब नहीं होता। कलावती के मुताबिक उनके एक दोस्त ने उन्हें एक बार इस्कान टेंपल में जाने की सलाह दी और फिर धीरे-धीरे कृष्ण का रंग ऐसा चढ़ा कि बाकी सारे रंग फीके पड़ गए। कुछ समय बाद उन्होंने दीक्षा ली और फिर अपना करोड़ों का फार्मिंग बिजनेस छोड़कर इस्कान की डिवोटी बन गई।
देश छोड़ा, लाखों का पैकेज को भी कहा बाय : कैटरीना अकेली ऐसी डिवोटी नहीं हैं। रूस और रूस से जुडे़ कई देशों में जहां कभी धर्म को अफीम माना जाता था। वहां भी ऐसी कई युवतियां हैं। जो अपना सब कुछ छोड़कर कृष्ण के रंग मे रंग गई हैं। दीक्षा के बाद एलिसिया से साध्वी बनी देवरूपा यूक्रेन की रहने वाली हैं। वह हिन्दी में भी उतने ही अधिकार से बात करती हैं जैसे इंग्लिश में। देवरूपा यूक्रेन की एक मल्टी नेशनल कंपनी में जियोलॉजिस्ट थीं। लाखों का पैकेज था। जिंदगी मस्त चल रही थी। एक दिन अचानक उनके दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी और रशियन भाषा में लिखी भागवत गीता पकड़ा दी। गीता पढ़कर उनकी जिज्ञासा उन्हें इस्कान टेंपल में ले गई और फिर उन्हें खुद पता नहीं चला कि कब एक जियोलॉजिस्ट कृष्ण की मीरा में बदल गई। दीक्षा के बाद अब वह यूक्रेन छोड़कर वृन्दावन में बस गई हैं।
करोड़ों का फाॅर्म बिजनेस खेती छोड़कर बनी कृष्ण की मीरा : दुनियाभर में फैशन और ग्लैमर के मक्का के रूप में मशहूर फ्रांस के सबसे बडे़ शहरों में से एक चेत्राक्स की रहने वाली कैटरीना अब कलावती दास माताजी बन गई हैं। कभी प्रतिदिन क्लब, डांस, ड्रामा और पार्टीज में शामिल होने वाली कैटरीना बताती हैं कि अब वे प्रतिदिन सुबह 4 बजे उठकर सोलह मालाएं जपती हैं। कृष्ण का श्रृंगार करती हैं और अपने आसपास के लोगों को कृष्ण से जोड़ने का प्रयास करती हैं।
सवालों के जवाब नहीं मिले : कलावती दास बताती हैं कि उनके जीवन में दौलत शोहरत के साथ ही सबकुछ था, लेकिन एक बेचैनी बनी रहती थी। वे कई बार चर्च भी जाती थीं, लेकिन उनके मन में उठने वाले सवालों के जवाब नहीं मिल रहे थे। वह जानना चाहती थीं कि क्यों कोई उनके जैसे अमीर घर में पैदा होता है और क्यों कोई सोमालिया जैसी जगह में जन्म लेता है, जहां उसे खाना भी नसीब नहीं होता। कलावती के मुताबिक उनके एक दोस्त ने उन्हें एक बार इस्कान टेंपल में जाने की सलाह दी और फिर धीरे-धीरे कृष्ण का रंग ऐसा चढ़ा कि बाकी सारे रंग फीके पड़ गए। कुछ समय बाद उन्होंने दीक्षा ली और फिर अपना करोड़ों का फार्मिंग बिजनेस छोड़कर इस्कान की डिवोटी बन गई।
देश छोड़ा, लाखों का पैकेज को भी कहा बाय : कैटरीना अकेली ऐसी डिवोटी नहीं हैं। रूस और रूस से जुडे़ कई देशों में जहां कभी धर्म को अफीम माना जाता था। वहां भी ऐसी कई युवतियां हैं। जो अपना सब कुछ छोड़कर कृष्ण के रंग मे रंग गई हैं। दीक्षा के बाद एलिसिया से साध्वी बनी देवरूपा यूक्रेन की रहने वाली हैं। वह हिन्दी में भी उतने ही अधिकार से बात करती हैं जैसे इंग्लिश में। देवरूपा यूक्रेन की एक मल्टी नेशनल कंपनी में जियोलॉजिस्ट थीं। लाखों का पैकेज था। जिंदगी मस्त चल रही थी। एक दिन अचानक उनके दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी और रशियन भाषा में लिखी भागवत गीता पकड़ा दी। गीता पढ़कर उनकी जिज्ञासा उन्हें इस्कान टेंपल में ले गई और फिर उन्हें खुद पता नहीं चला कि कब एक जियोलॉजिस्ट कृष्ण की मीरा में बदल गई। दीक्षा के बाद अब वह यूक्रेन छोड़कर वृन्दावन में बस गई हैं।
कृष्ण की हुई क्रिस्टिना : यूरोप के लेटविया मे रहने
वाली क्रिस्टिना की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। रशियन यूनिवर्सिटी से एमबीए
करने के बाद क्रिस्टिना एक क्रूज कम्पनी मे एचआर मैनेजर थीं। उन्हें उनके
ही एक रिश्तेदार ने इस्कान टेंपल से जोड़ा और अब वह जुड़ाव इतना गहरा हो
गया है कि वह अगले कुछ दिनों में दीक्षा लेने जा रही हैं।
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